सुरक्षा एक राष्ट्रीय मुद्दा बनना चाहिए. भ्रष्टाचार एंड ब्लैक मनी के साथ साथ सुरक्षा भी एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है. तीनो ही एक दुसरे से जुडी हुई हैं लेकिन भ्रष्टाचार एंड ब्लैक मनी की लड़ाई तभी लड़ी जा सकती है जब हम जिंदा रहेंगे. आज कोई गारंटी नहीं की हम कब मर जाएँ, कोई गारंटी नहीं कब कोई बिस्फोट हो जाये.
सेना में कोई भी जवान धोके से मरना पसंद नहीं करता, लड़ के मरना पसंद करता है. आज सेना का जवान असहाय महसूस कर रहा है, कभी सर काट ले जाते हैं तो कभी पीछे से बार करके मार दिया जाता है.
या तो आर पार कर लो या डिप्लोमेटिक स्तर पर ऐसा दवाव बनाओ की दुश्मन अपने चक्करों में ही फंसा रहे. लेकिन आज की सरकार अहिंसक बिचारधारा से ज्यादा ही प्रभावित दिख रही है, तुम हमारे कितने ही जवानों को मार लो हम चूं तक नहीं करेंगे, तुम 5 मारोगे तो हम 10 और खड़े कर देंगे, तुम 10 मारोगे तो हम 20 खड़े कर देंगे.
बात बहुत सीधी है की सड़क गन्दी हो रही है, हमें पता है कौन गंदी कर रहा है, हमें पता है साफ़ कैसे करना है, हमें ये भी पता है की सफाई ऐसे करनी है की सड़क टूट न जाये लेकिन हम सबको ये हिदायत देते आ रहे हैं की देखो सड़क गन्दी है चप्पल जूता पहन के निकलो कहीं पैर गंदे न हो जाये, कहीं पैरों में कांटा न लग जाये.
भोंपू लगवा के बता रहे हैं की किरायेदार आतंकबादी हो सकता है, कोई लावारिश चीज़ बम हो सकती है बगैरह बगैरह... ऐसे आतंकबाद रुक ही नहीं सकता.... ऐसे हमारी सीमाये सुरक्षित हो ही नहीं सकती. हमें आतंकी फैक्ट्री को ख़त्म करना पड़ेगा, सिर्फ अपनी सीमओं की रक्षा करने से काम नहीं चलेगा बल्कि दूसरों के यहाँ भी अगर आतंकी कैंप है तो उसे उड़ाना पड़ेगा.
सेना में कोई भी जवान धोके से मरना पसंद नहीं करता, लड़ के मरना पसंद करता है. आज सेना का जवान असहाय महसूस कर रहा है, कभी सर काट ले जाते हैं तो कभी पीछे से बार करके मार दिया जाता है.
या तो आर पार कर लो या डिप्लोमेटिक स्तर पर ऐसा दवाव बनाओ की दुश्मन अपने चक्करों में ही फंसा रहे. लेकिन आज की सरकार अहिंसक बिचारधारा से ज्यादा ही प्रभावित दिख रही है, तुम हमारे कितने ही जवानों को मार लो हम चूं तक नहीं करेंगे, तुम 5 मारोगे तो हम 10 और खड़े कर देंगे, तुम 10 मारोगे तो हम 20 खड़े कर देंगे.
बात बहुत सीधी है की सड़क गन्दी हो रही है, हमें पता है कौन गंदी कर रहा है, हमें पता है साफ़ कैसे करना है, हमें ये भी पता है की सफाई ऐसे करनी है की सड़क टूट न जाये लेकिन हम सबको ये हिदायत देते आ रहे हैं की देखो सड़क गन्दी है चप्पल जूता पहन के निकलो कहीं पैर गंदे न हो जाये, कहीं पैरों में कांटा न लग जाये.
भोंपू लगवा के बता रहे हैं की किरायेदार आतंकबादी हो सकता है, कोई लावारिश चीज़ बम हो सकती है बगैरह बगैरह... ऐसे आतंकबाद रुक ही नहीं सकता.... ऐसे हमारी सीमाये सुरक्षित हो ही नहीं सकती. हमें आतंकी फैक्ट्री को ख़त्म करना पड़ेगा, सिर्फ अपनी सीमओं की रक्षा करने से काम नहीं चलेगा बल्कि दूसरों के यहाँ भी अगर आतंकी कैंप है तो उसे उड़ाना पड़ेगा.

