Friday, May 31, 2013

अचम्भे वाली बात तो ये है की किये गए हमले में जहाँ नक्सालियो ने 30 से ज्यादा लोगो की निमर्म हत्या की वही कुछ लोगो को नक्सालियो ने फर्स्ट एड भी किया.

जनता के विचारों को सुनने के बाद तो यही लगता है कि वो नक्सल के साथ है. आदिवासियों में से कुछ लोग निकल कर नक्सल बन गए है, अगर ऐसा है फिर तो इसका समाधान जोर जबरदस्ती नहीं किया जा सकता.

नीचे Facebook के कुछ कमेंट हैं जो इस बाबत मिले हैं.
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अगर आदिवासियों को लगता है कि पिछले कुछ दशकों से उनके साथ अन्याय हुआ है, उनकी जड़ जंगल जमीन छीनी गयी है, हिंसा और बलात्कार की घटनाएँ हुई हैं तो वो जंतर मंतर आकर आमरण अनशन कर सकते हैं। बन्दूक उठाने से या नक्सल का समर्थन करने से समस्या का हल नहीं निकलने वाला !!!
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अचम्भे वाली बात तो ये है की किये गए हमले में जहाँ नक्सालियो ने 30 से ज्यादा लोगो की निमर्म हत्या की वही कुछ लोगो को नक्सालियो ने फर्स्ट एड भी किया.

To my surprise, a women Maoist brought out a medical kit, bandaged my wound, and gave me an injection. I was stunned, yet grateful.
: Shiv Narayan Dwivedi
Congress Leader
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