जो लोग सक्षम हैं, संम्पन्न हैं, काबिल हैं, किसी भी स्थिति से लड़ सकते हैं, हिम्मत वाले हैं पर भ्रष्ट नहीं हैं उन्हें सिर्फ इस बात से खुश नहीं होना चाहिए कि उन्होंने इस सड़ी गली व्यबस्था में कुछ कर के दिखाया है. आपने कुछ कर के दिखाया है बहुत अच्छी बात है पर हर किसी से ये उम्मीद करना वो भी उनके जैसा करें गलत है. आप उनके लिए कुछ तो करिए सिर्फ अपने आप में जीना भी ठीक नहीं. बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारी आती है. आप आम आदमी नहीं हैं.
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सत्यमेव जयते के अनुसार कन्या भ्रूण हत्या पर डॉक्टर ने बताया की 70 के दशक में शुरू हुआ था ये काम. लेकिन जनता को ये आप्शन कांग्रेस की सरकार ने दिया था. बेटों की चाह में ज्यादा बच्चे हो रहे थे, कांग्रेस सरकार ने कहा अगर बेटा ही चाहिए तो ठीक है बेटी क्यों ला रहे हो हटा दो इसे. भारत की जनता कभी बेटियों की हत्या करना नहीं चाहती थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने ओर डॉक्टर्स ने उसको ये करने को कहा ओर फिर शुरू हो गया पैसे बनाने का खेल.
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सत्यमेव जयते पर बहुत हो हल्ला है, कमेन्ट पर कमेन्ट हैं. अगर जो दिखाया जा रहा है वो एक समस्या है, मुद्दा है तो उसका स्वागत होना चाहिए पर जनता को ऐसे लोगों को सर पर नहीं बिठाना चाहिए. जो मुद्दा उठा रहा है वो पैसे बनाने के लिए उठा रहा है इसमें कोई शक नहीं पर अच्छी बात ये है मुद्दे उठाकर भी पैसे बनाये जा सकते हैं.
जाने कितने फ़िल्मकार ओर एक्टर ऐसे हैं जो गलत ओर बकबास चीजें बना रहे हैं ओर पैसे भी कमा रहे हैं. महेश भट्ट जैसे लोग हमेशा गन्दगी से पैसा बनाते हैं ऐसे लोग बहुत बड़ी समस्या हैं. बाकि किसी भी फिल्मस्टार से उम्मीद करना की वो जो सीरियल ओर फिल्मों में बोल रहा है वही सच में करे ओर मुद्दों को लेकर आन्दोलन करने लगे ऐसा सोचना गलत है.
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जापान में इन दिनों योग की धूम मची हुई है और हमारे देश में इसको नष्ट करने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास में लगी हुई है.
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1997 से 2008 के बीच भारत में कृषि पर सरकार की गलत नीति के कारण देश में 200000 लाख किसानों ने आत्महत्या कर ली है। सरकार के निकम्मेपन के कारण बड़े पैमाने पर भारतीय किसान आत्महत्या कर रहे हैं और सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं
विगत पांच वर्ष में देश के 46,000 जवानों ने अर्द्धसैनिक बलों से स्वैच्छिक अवकाश-ग्रहण कर अपनी सेवाएं वापस ले लीं।
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स्विस बैंक में ब्लैक मनी जमा करने के मामले में राजनेताओं के साथ-साथ अब इंडियन क्रिकेटरों और बॉलिवुड स्टार्स के भी नाम आ रहे हैं। स्विस बैंक के पूर्व कर्मचारी और केमन आइलैंड के हेड रह चुके रूडोल्फ एमर ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि भारत सरकार ब्लैक मनी के मामले में गंभीर नहीं है।
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सबसे ऊपर देश की जनता की खुशहाली है, अगर हमारा बर्तमान सिस्टम जिसमे लोकसभा, राज्यसभा, बिधानसभा, बिधानपरिषद, नगर पालिका....बगैरह आते हैं इन सबसे देश के गरीब मजदूर किसान का भला नहीं हो पा रहा है तो इसका मतलब या तो ये सब बेकार है या यहाँ जो लोग हैं वो बेकार है. सब जानते है की लोकसभा में लोग कई तिकड़मे लगाकर ओर मात्र कुछ 15% वोट लेकर पहुँचते हैं और फिर पूरे 100% लोगों पर राज करते हैं. जाहिर सी बात है बाकि के 85% लोग चोर ही कहेंगे. इसलिए या तो ऐसा हो की 100% वोटिंग हो या फिर जो चुनकर जा रहा है वो अपनी जिम्मेदारी समझे नहीं तो गालियाँ पड़ेगी ही.
जनता अंतिम व्यक्ति है इस देश की, उसे जिम्मेदार ठहराना बिलकुल गलत है. आज़ादी के बाद से देश बैसा ही बना है जैसा नेहरु ओर उनकी कांग्रेस ने बनाया. अगर लाल बहादुर शास्त्री ओर सरदार पटेल जैसे नेताओ ने राज किया होता तो नेताओं को कभी गाली नहीं पड़ती.
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राष्ट्र प्रेम सबसे ऊपर है, इसके लिए कभी कभी मर्यादा को तोडना भी पड़े तो तोडनी चाहिए. इसमें कोई शक नहीं की संसद में चोर भी है और अछे लोग भी, बस कहने से डरते हैं लोग. हमें बदलाव का साथ देना चाहिए नहीं तो जैसा पिछले कई सालों से होता आ रहा है वही होता रहेगा. देश में जो एक भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ जो जागरूकता आई है हम सबको उसका स्वागत करना चाहिए.
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देश की संसद ये क्यों नहीं कहती की हम अपनी इमेज को सुधारेंगे, जनता तारीफ भी कर सकती है और बुरे भी. जनता हमेशा नेताओं की और पुलिस की बुराई क्यों करती है. क्यों एक गलत बिचारधारा नेताओं के बारे बन गयी है की नेता चोर है. देश के सारे नेताओं को इसके बारे सही दिशा में सोचना पड़ेगा. कर्म से ही पहचान बनेगी. मर्यादा में सिर्फ जनता ही क्यों रहे.
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काले धन को वापस लाने की बात मत कहो !! राईट टू रिजेक्ट पर बात मत करो !! घोटालो पर बात मत करो !! इन सब के लिए संसद है ना !! हमको जनता ने चुन कर भेजा है !! हम पाँच साल के लाइसेंसी हैं !! जनता कौन होती है......संसद में हस्तक्षेप करने वाली ? जनता का काम है की आम आदमी की तरह जिए और आम आदमी की तरह मरे.
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भ्रम होती है हार, व्यक्ति चाहे तो वो फिर से प्रयास कर सकता है जीत के लिए. जब वो मन से हार को स्वीकार करता है तब वो होता है पराजित. कई बार मन से हार मानने वालों को और हार से हताश होने वालों को इस बात का पता ही नहीं होता की जब उन्होंने हिम्मत छोड़ी तब वो जीत के कितने पास थे. हर हार जीत के रास्ते में आने वाली एक अनुभव मात्र होती है ऐसा अनुभव जो हमें बहुत कुछ सिखाता है, हमारी कमिया हमें बताता है, हमें जीत के और पास ले जाता है.
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इससे पहले समस्या हमें समाप्त करे, हमें समस्या को मिटा देना चाहिए. आज की सबसे बड़ी समस्या क्या है ये जनता जानती है.
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बोर्नविटा , कॉम्प्लान या होर्लिक्स किसी भी प्राकृतिक आहार से अच्छे नहीं हो सकते . इनके लुभावने विज्ञापनों का कभी भरोसा मत करिए
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गरिमा, निष्पक्षता, संविधान, जिम्मेवारी, ईमानदारी, हक, सेवा, शपथ..... बकबास है सब अरे दीमक चाट गयी ऐसे शब्दों को कांग्रेसी राज में. यहाँ सिर्फ चापलूसी बिकती है बस.
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भारत रत्न की प्यास में सचिन अंधे हो गए हैं जो कांग्रेस के साथ हो लिए. वो भूल गए की भारत में 80% लोग रोज़ 25 रुपये में गुज़ारा कर रहे हैं कांग्रेस की बजह से, लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं कांग्रेस की बजह से, आतंकबाद बड़ रहा है कांग्रेस की बजह से, मंहगाई ओर भ्रष्टाचार की बजह से आम आदमी मर रहा है कांग्रेस की बजह से. आजादी के बाद की ये सबसे बड़ी भ्रष्ट, निकम्मी ओर अत्याचारी सरकार है. या तो सचिन को ये पता नहीं है या फिर Pepsi और Boost के प्यार में उन्हें भारत के वो लोग दिखाई देना बंद हो गए हैं जिनके पास न तो साफ़ पानी है और न ही दूध जिसमे वे Boost घोल के पी सके ओर कहे:
Boost is the Secret of My Energy
भारत की जनता अगर सर पे बिठा सकती है तो जमीन पर गिरा भी सकती है.
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सिंघवी ने पूरे भारत की जनता के चरित्र पर ये कहकर उंगली उठाई है की आज मेरी CD आई है कल आपकी आएगी. इसका मतलब वो सबको अपने जैसा ही समझते हैं. दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर हाय तौबा मचने के बजाये न्यूज़ चैन्नेल्स को चरित्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रम दिखाने चाहिए. कोई भी इंसान आलोचना से तभी बच सकता है जब उसके चाहने वाले बिरोधियों से ज्यादा हों. सिंघवी का अगर कोई चाहने वाला नहीं है तो इसमें कोर्ट क्या करे.
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भारतीय प्रेस परिषद के नये अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने भारतीय इलेक्ट्रानिक एवं प्रिण्ट मीडिया को सरेआम लताड़ते हुए एक इंटरव्यू में कहा है कि -
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भारत का मीडिया महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, बदतर स्वास्थ्य सुविधाओं की खबरें दिखाने की बजाय क्रिकेट, फ़िल्में, ज्योतिष, जादूटोना और फ़ैशन जैसी अनावश्यक बातें जानबूझकर दिखाता है
सरकारी लापरवाही और अव्यवस्था का आलम अच्छी घटनाओं को भी बुरी खबरों में तब्दील कर देता है। अच्छी खबर ये है कि पिछले दो साल जबरदस्त पैदावार होने के बाद इस साल भी अनाज की रिकॉर्ड फसल होने जा रही है लेकिन बुरी खबर ये है कि इस फसल का एक बड़ा हिस्सा खुले में रखा सड़ जाएगा क्योंकि सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं और चावल के रिकॉर्ड पैदावार के बाद फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने हाथ खड़े कर दिए हैं। एफसीआई के पास इतना अनाज जमा करने की न तो क्षमता है और ना ही पैसा।
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सिंघवी ने कहा क्या इन्टरनेट कोर्ट से ऊपर है. सही बात बिलकुल नहीं है. लेकिन उनकी CD इन्टरनेट नहीं जनता डाल रही है. नेट तो बस एक माध्यम है. ऐसी स्थिति में केवल और केवल एक ही उपाय है - कोई भी इंसान आलोचना से तभी बच सकता है जब चाहने वाले बिरोधियों से ज्यादा हों. सिंघवी का अगर कोई चाहने वाला नहीं है तो इसमें कोर्ट कुछ नहीं कर सकता. सिंघवी को चाहिए कांग्रेस पार्टी छोड़ें, पश्चाताप करें और देश सेवा में लगें. जनता उन्हें भी चाहने लगेगी.
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शाहरूख खान कोई राष्ट्रपति है न प्रधानमंत्री, जिसे सुरक्षा जांच में छूट मिलनी चाहिए। अमेरिका ने आतंकवाद की खूनी हिंसा झेली है। इसलिए चाकचैबंद सुरक्षा जांच उसकी आवश्यकता है।
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शिक्षा का अधिकार - कांग्रेस सरकारों की बजह से आज देश में प्राइवेट ओर सरकारी स्कूलों में इतना बड़ा अंतर पैदा हो गया है की 25% सीट्स गरीबों के लिए हर स्कूल में हों ये बात प्राइवेट वालों को पच नहीं रही. अमीर माँ बाप ये नहीं पचा पा रहे की उनका बच्चा गरीब बच्चों के एक क्लास में बैठेगा. सबसे अच्छा यही रहेगा सभी प्राइवेट स्कूल शिक्षा पर ध्यान दे न की हाई फाई दिखने वाली फ़ालतू ओर बकवास चीज़ों पर. अगर कांग्रेस की नीतियां सही होती तो अमीर गरीब में इतना अंतर पैदा ही नहीं होता.
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सत्यमेव जयते के अनुसार कन्या भ्रूण हत्या पर डॉक्टर ने बताया की 70 के दशक में शुरू हुआ था ये काम. लेकिन जनता को ये आप्शन कांग्रेस की सरकार ने दिया था. बेटों की चाह में ज्यादा बच्चे हो रहे थे, कांग्रेस सरकार ने कहा अगर बेटा ही चाहिए तो ठीक है बेटी क्यों ला रहे हो हटा दो इसे. भारत की जनता कभी बेटियों की हत्या करना नहीं चाहती थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने ओर डॉक्टर्स ने उसको ये करने को कहा ओर फिर शुरू हो गया पैसे बनाने का खेल.
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सत्यमेव जयते पर बहुत हो हल्ला है, कमेन्ट पर कमेन्ट हैं. अगर जो दिखाया जा रहा है वो एक समस्या है, मुद्दा है तो उसका स्वागत होना चाहिए पर जनता को ऐसे लोगों को सर पर नहीं बिठाना चाहिए. जो मुद्दा उठा रहा है वो पैसे बनाने के लिए उठा रहा है इसमें कोई शक नहीं पर अच्छी बात ये है मुद्दे उठाकर भी पैसे बनाये जा सकते हैं.
जाने कितने फ़िल्मकार ओर एक्टर ऐसे हैं जो गलत ओर बकबास चीजें बना रहे हैं ओर पैसे भी कमा रहे हैं. महेश भट्ट जैसे लोग हमेशा गन्दगी से पैसा बनाते हैं ऐसे लोग बहुत बड़ी समस्या हैं. बाकि किसी भी फिल्मस्टार से उम्मीद करना की वो जो सीरियल ओर फिल्मों में बोल रहा है वही सच में करे ओर मुद्दों को लेकर आन्दोलन करने लगे ऐसा सोचना गलत है.
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जापान में इन दिनों योग की धूम मची हुई है और हमारे देश में इसको नष्ट करने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास में लगी हुई है.
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1997 से 2008 के बीच भारत में कृषि पर सरकार की गलत नीति के कारण देश में 200000 लाख किसानों ने आत्महत्या कर ली है। सरकार के निकम्मेपन के कारण बड़े पैमाने पर भारतीय किसान आत्महत्या कर रहे हैं और सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं
विगत पांच वर्ष में देश के 46,000 जवानों ने अर्द्धसैनिक बलों से स्वैच्छिक अवकाश-ग्रहण कर अपनी सेवाएं वापस ले लीं।
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स्विस बैंक में ब्लैक मनी जमा करने के मामले में राजनेताओं के साथ-साथ अब इंडियन क्रिकेटरों और बॉलिवुड स्टार्स के भी नाम आ रहे हैं। स्विस बैंक के पूर्व कर्मचारी और केमन आइलैंड के हेड रह चुके रूडोल्फ एमर ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि भारत सरकार ब्लैक मनी के मामले में गंभीर नहीं है।
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सबसे ऊपर देश की जनता की खुशहाली है, अगर हमारा बर्तमान सिस्टम जिसमे लोकसभा, राज्यसभा, बिधानसभा, बिधानपरिषद, नगर पालिका....बगैरह आते हैं इन सबसे देश के गरीब मजदूर किसान का भला नहीं हो पा रहा है तो इसका मतलब या तो ये सब बेकार है या यहाँ जो लोग हैं वो बेकार है. सब जानते है की लोकसभा में लोग कई तिकड़मे लगाकर ओर मात्र कुछ 15% वोट लेकर पहुँचते हैं और फिर पूरे 100% लोगों पर राज करते हैं. जाहिर सी बात है बाकि के 85% लोग चोर ही कहेंगे. इसलिए या तो ऐसा हो की 100% वोटिंग हो या फिर जो चुनकर जा रहा है वो अपनी जिम्मेदारी समझे नहीं तो गालियाँ पड़ेगी ही.
जनता अंतिम व्यक्ति है इस देश की, उसे जिम्मेदार ठहराना बिलकुल गलत है. आज़ादी के बाद से देश बैसा ही बना है जैसा नेहरु ओर उनकी कांग्रेस ने बनाया. अगर लाल बहादुर शास्त्री ओर सरदार पटेल जैसे नेताओ ने राज किया होता तो नेताओं को कभी गाली नहीं पड़ती.
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राष्ट्र प्रेम सबसे ऊपर है, इसके लिए कभी कभी मर्यादा को तोडना भी पड़े तो तोडनी चाहिए. इसमें कोई शक नहीं की संसद में चोर भी है और अछे लोग भी, बस कहने से डरते हैं लोग. हमें बदलाव का साथ देना चाहिए नहीं तो जैसा पिछले कई सालों से होता आ रहा है वही होता रहेगा. देश में जो एक भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ जो जागरूकता आई है हम सबको उसका स्वागत करना चाहिए.
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देश की संसद ये क्यों नहीं कहती की हम अपनी इमेज को सुधारेंगे, जनता तारीफ भी कर सकती है और बुरे भी. जनता हमेशा नेताओं की और पुलिस की बुराई क्यों करती है. क्यों एक गलत बिचारधारा नेताओं के बारे बन गयी है की नेता चोर है. देश के सारे नेताओं को इसके बारे सही दिशा में सोचना पड़ेगा. कर्म से ही पहचान बनेगी. मर्यादा में सिर्फ जनता ही क्यों रहे.
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काले धन को वापस लाने की बात मत कहो !! राईट टू रिजेक्ट पर बात मत करो !! घोटालो पर बात मत करो !! इन सब के लिए संसद है ना !! हमको जनता ने चुन कर भेजा है !! हम पाँच साल के लाइसेंसी हैं !! जनता कौन होती है......संसद में हस्तक्षेप करने वाली ? जनता का काम है की आम आदमी की तरह जिए और आम आदमी की तरह मरे.
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भ्रम होती है हार, व्यक्ति चाहे तो वो फिर से प्रयास कर सकता है जीत के लिए. जब वो मन से हार को स्वीकार करता है तब वो होता है पराजित. कई बार मन से हार मानने वालों को और हार से हताश होने वालों को इस बात का पता ही नहीं होता की जब उन्होंने हिम्मत छोड़ी तब वो जीत के कितने पास थे. हर हार जीत के रास्ते में आने वाली एक अनुभव मात्र होती है ऐसा अनुभव जो हमें बहुत कुछ सिखाता है, हमारी कमिया हमें बताता है, हमें जीत के और पास ले जाता है.
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इससे पहले समस्या हमें समाप्त करे, हमें समस्या को मिटा देना चाहिए. आज की सबसे बड़ी समस्या क्या है ये जनता जानती है.
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बोर्नविटा , कॉम्प्लान या होर्लिक्स किसी भी प्राकृतिक आहार से अच्छे नहीं हो सकते . इनके लुभावने विज्ञापनों का कभी भरोसा मत करिए
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गरिमा, निष्पक्षता, संविधान, जिम्मेवारी, ईमानदारी, हक, सेवा, शपथ..... बकबास है सब अरे दीमक चाट गयी ऐसे शब्दों को कांग्रेसी राज में. यहाँ सिर्फ चापलूसी बिकती है बस.
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भारत रत्न की प्यास में सचिन अंधे हो गए हैं जो कांग्रेस के साथ हो लिए. वो भूल गए की भारत में 80% लोग रोज़ 25 रुपये में गुज़ारा कर रहे हैं कांग्रेस की बजह से, लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं कांग्रेस की बजह से, आतंकबाद बड़ रहा है कांग्रेस की बजह से, मंहगाई ओर भ्रष्टाचार की बजह से आम आदमी मर रहा है कांग्रेस की बजह से. आजादी के बाद की ये सबसे बड़ी भ्रष्ट, निकम्मी ओर अत्याचारी सरकार है. या तो सचिन को ये पता नहीं है या फिर Pepsi और Boost के प्यार में उन्हें भारत के वो लोग दिखाई देना बंद हो गए हैं जिनके पास न तो साफ़ पानी है और न ही दूध जिसमे वे Boost घोल के पी सके ओर कहे:
Boost is the Secret of My Energy
भारत की जनता अगर सर पे बिठा सकती है तो जमीन पर गिरा भी सकती है.
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सिंघवी ने पूरे भारत की जनता के चरित्र पर ये कहकर उंगली उठाई है की आज मेरी CD आई है कल आपकी आएगी. इसका मतलब वो सबको अपने जैसा ही समझते हैं. दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर हाय तौबा मचने के बजाये न्यूज़ चैन्नेल्स को चरित्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रम दिखाने चाहिए. कोई भी इंसान आलोचना से तभी बच सकता है जब उसके चाहने वाले बिरोधियों से ज्यादा हों. सिंघवी का अगर कोई चाहने वाला नहीं है तो इसमें कोर्ट क्या करे.
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भारतीय प्रेस परिषद के नये अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने भारतीय इलेक्ट्रानिक एवं प्रिण्ट मीडिया को सरेआम लताड़ते हुए एक इंटरव्यू में कहा है कि -
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भारत का मीडिया महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, बदतर स्वास्थ्य सुविधाओं की खबरें दिखाने की बजाय क्रिकेट, फ़िल्में, ज्योतिष, जादूटोना और फ़ैशन जैसी अनावश्यक बातें जानबूझकर दिखाता है
सरकारी लापरवाही और अव्यवस्था का आलम अच्छी घटनाओं को भी बुरी खबरों में तब्दील कर देता है। अच्छी खबर ये है कि पिछले दो साल जबरदस्त पैदावार होने के बाद इस साल भी अनाज की रिकॉर्ड फसल होने जा रही है लेकिन बुरी खबर ये है कि इस फसल का एक बड़ा हिस्सा खुले में रखा सड़ जाएगा क्योंकि सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं और चावल के रिकॉर्ड पैदावार के बाद फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने हाथ खड़े कर दिए हैं। एफसीआई के पास इतना अनाज जमा करने की न तो क्षमता है और ना ही पैसा।
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सिंघवी ने कहा क्या इन्टरनेट कोर्ट से ऊपर है. सही बात बिलकुल नहीं है. लेकिन उनकी CD इन्टरनेट नहीं जनता डाल रही है. नेट तो बस एक माध्यम है. ऐसी स्थिति में केवल और केवल एक ही उपाय है - कोई भी इंसान आलोचना से तभी बच सकता है जब चाहने वाले बिरोधियों से ज्यादा हों. सिंघवी का अगर कोई चाहने वाला नहीं है तो इसमें कोर्ट कुछ नहीं कर सकता. सिंघवी को चाहिए कांग्रेस पार्टी छोड़ें, पश्चाताप करें और देश सेवा में लगें. जनता उन्हें भी चाहने लगेगी.
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शाहरूख खान कोई राष्ट्रपति है न प्रधानमंत्री, जिसे सुरक्षा जांच में छूट मिलनी चाहिए। अमेरिका ने आतंकवाद की खूनी हिंसा झेली है। इसलिए चाकचैबंद सुरक्षा जांच उसकी आवश्यकता है।
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शिक्षा का अधिकार - कांग्रेस सरकारों की बजह से आज देश में प्राइवेट ओर सरकारी स्कूलों में इतना बड़ा अंतर पैदा हो गया है की 25% सीट्स गरीबों के लिए हर स्कूल में हों ये बात प्राइवेट वालों को पच नहीं रही. अमीर माँ बाप ये नहीं पचा पा रहे की उनका बच्चा गरीब बच्चों के एक क्लास में बैठेगा. सबसे अच्छा यही रहेगा सभी प्राइवेट स्कूल शिक्षा पर ध्यान दे न की हाई फाई दिखने वाली फ़ालतू ओर बकवास चीज़ों पर. अगर कांग्रेस की नीतियां सही होती तो अमीर गरीब में इतना अंतर पैदा ही नहीं होता.
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Participatory Notes के जरिये स्टाक मार्केट में जो सबसे बड़ा घोटाला चल रहा है उसके बारे में आम जनता को कुछ पता ही नहीं है | आम जनता यदि स्टाक मार्केट में पैसा लगाये तो पैसे का स्रोत बताना पड़ेगा और सेबी को जाँच का पूरा अधिकार है | लेकिन इस सरकार ने PN के जरिये, देश के लुटेरों को विदेशी बैंकों में जमा धन को मारीशस रूट से स्टाक मार्केट में लगाने की अनुमति दी हुयी है | SEBI को यह पूछने का अधिकार नहीं कि ये पैसा किसका है | और स्टाक को बेचने से होने वाले लाभ को भी टैक्स फ्री कर दिया गया है |
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IPL शरु हुआ हे तो मीडिया ऐसे नाच रही हे जैसे भारत से गरीबी, महंगाई,भुखमरी,भ्रष्टाचार ,बेरोजगारी,अत्याचार,आतंकवाद , सब ख़तम हो गया हो..!!