सिंघवी ने पूरे भारत की जनता के चरित्र पर ये कहकर उंगली उठाई है की आज मेरी CD आई है कल आपकी आएगी. इसका मतलब वो सबको अपने जैसा ही समझते हैं. दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर हाय तौबा मचने के बजाये न्यूज़ चैन्नेल्स को चरित्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रम दिखाने चाहिए. कोई भी इंसान आलोचना से तभी बच सकता है जब उसके चाहने वाले बिरोधियों से ज्यादा हों. सिंघवी का अगर कोई चाहने वाला नहीं है तो इसमें कोर्ट क्या करे.
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FB, YouTube और बाकी sites पर लोगों के अथक प्रयासों से आख़िरकार सिंघवी को Parliamentary Standing Committee on Law and Justice के चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है. क्योंकि मीडिया और बिपक्ष से उम्मीद करना बेकार है. मीडिया काफी हद तक कांग्रेस के हिसाब से न्यूज़ दिखाती है और बिपक्ष अगर बहुत ज्यादा हो तो सदन में दो चार डायलोग मार देता है बस.
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सिंघवी ने कहा क्या इन्टरनेट कोर्ट से ऊपर है. सही बात बिलकुल नहीं है. लेकिन उनकी CD इन्टरनेट नहीं जनता डाल रही है. नेट तो बस एक माध्यम है. ऐसी स्थिति में केवल और केवल एक ही उपाय है - कोई भी इंसान आलोचना से तभी बच सकता है जब चाहने वाले बिरोधियों से ज्यादा हों. सिंघवी का अगर कोई चाहने वाला नहीं है तो इसमें कोर्ट कुछ नहीं कर सकता. सिंघवी को चाहिए कांग्रेस पार्टी छोड़ें, पश्चाताप करें और देश सेवा में लगें. जनता उन्हें भी चाहने लगेगी.
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FB, YouTube और बाकी sites पर लोगों के अथक प्रयासों से आख़िरकार सिंघवी को Parliamentary Standing Committee on Law and Justice के चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है. क्योंकि मीडिया और बिपक्ष से उम्मीद करना बेकार है. मीडिया काफी हद तक कांग्रेस के हिसाब से न्यूज़ दिखाती है और बिपक्ष अगर बहुत ज्यादा हो तो सदन में दो चार डायलोग मार देता है बस.
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सिंघवी ने कहा क्या इन्टरनेट कोर्ट से ऊपर है. सही बात बिलकुल नहीं है. लेकिन उनकी CD इन्टरनेट नहीं जनता डाल रही है. नेट तो बस एक माध्यम है. ऐसी स्थिति में केवल और केवल एक ही उपाय है - कोई भी इंसान आलोचना से तभी बच सकता है जब चाहने वाले बिरोधियों से ज्यादा हों. सिंघवी का अगर कोई चाहने वाला नहीं है तो इसमें कोर्ट कुछ नहीं कर सकता. सिंघवी को चाहिए कांग्रेस पार्टी छोड़ें, पश्चाताप करें और देश सेवा में लगें. जनता उन्हें भी चाहने लगेगी.