अपराध क्यों बढते हैं ज्यादा पैसे कमाने की चाहत में, ज्यादा पैसे कमाने की चाहत क्यों उत्पन्न होती है वो भी किसी गलत तरीके से क्योंकि सही तरीके से नहीं कमाए जा सकते लेकिन पैसे हर हाल में चाहिए. हर हाल में चाहिए मतलब किसी से तुलना करनी है. पिछले 62 सालों में घटिया और बकबास सरकारी नीतियों ने इस देश में बहुत बड़ा अंतर पैदा कर दिया है जो आजादी से पहले के समय नहीं था. आजादी के काफी समय पहले देश में बहुत समानता थी आर्थिक रूप से. गरीब ओर अमीर में ज्यादा अंतर नहीं था मतलब गरीब वही था जो निठल्ला था ओर अमीर वही था जो मेहनती था.
लेकिन आजादी के बाद की घटिया, बहियाद करप्ट नीतियों ने हरामखोरों के हाथ में पैसा दे दिया, गरीब ओर गरीब हो गया. ऐसा माहौल बना दिया की 80% लोगों को रोज़ के खर्च करने के लिए 20 रुपये हैं ओर उसी देश में 100 रुपये की काफी मिलती हैं ओर लोग पीते भी हैं, अब समस्या ये है की जो 100 रुपये की काफी पी रहा है उनमे से 80 % के पास करप्ट पैसा हैं. अब गरीब आदमी अपनी और अपने बाप दादाओं के खून पसीने की कमाई को जब हरामखोरों के हाथ में देखता है तो उसे गुस्सा आता है, कुछ इस बात को दवा जाते हैं कुछ किस्मत का रोना रोते हैं लेकिन कुछ कहते हैं की मेरा पैसा हैं हम तो छीनेंगे... बस यही से अपराध करने की भावना जागती है.
अगर सरकार की नीतिया सही हो तो 80% अपराधों को रोका जा सकता है
लेकिन आजादी के बाद की घटिया, बहियाद करप्ट नीतियों ने हरामखोरों के हाथ में पैसा दे दिया, गरीब ओर गरीब हो गया. ऐसा माहौल बना दिया की 80% लोगों को रोज़ के खर्च करने के लिए 20 रुपये हैं ओर उसी देश में 100 रुपये की काफी मिलती हैं ओर लोग पीते भी हैं, अब समस्या ये है की जो 100 रुपये की काफी पी रहा है उनमे से 80 % के पास करप्ट पैसा हैं. अब गरीब आदमी अपनी और अपने बाप दादाओं के खून पसीने की कमाई को जब हरामखोरों के हाथ में देखता है तो उसे गुस्सा आता है, कुछ इस बात को दवा जाते हैं कुछ किस्मत का रोना रोते हैं लेकिन कुछ कहते हैं की मेरा पैसा हैं हम तो छीनेंगे... बस यही से अपराध करने की भावना जागती है.
अगर सरकार की नीतिया सही हो तो 80% अपराधों को रोका जा सकता है