Sunday, July 24, 2011

ग़ुलामी बता के नहीं आती, बस आ ही जाती है - तैयार रहे

अगर किसी देश के ज्यादातर मीडिया बिक जाये तो क्या होगा उस देश का. जनता वही सच मानने लगती है जो मीडिया दिखाती है, मतलब अगर मीडिया किसी एक पार्टी के तरफ झुकाव पैदा करना चाहे तो कर सकती है, मीडिया उस पार्टी की अच्छी चीज़ों को दिखाए ओर बाकि सबकी बुरी चीजें तो जनता को बाकि सारी पार्टियाँ बेकार लगती हैं. अख़बार, समाचार हर जगह एक ही तरह की न्यूज़ आएँगी तो जनता का झुकाव उसकी तरफ पक्का है. देश की जनता ने कांग्रेस को वोट दिया है सही बात है, जाहिर सी बात है जनता को कांग्रेस पसंद होगी. नेहरू से मनमोहन तक कांग्रेस ने इतना लूटा है फिर भी जनता ने इन्हें चुना क्यों, जाहिर सी बात है जनता को आज भी कांग्रेस की असलियत समझ नहीं आ रही क्यों. सच दिखाने की जिम्मेदारी किसकी है - मीडिया की और बिपक्ष की.

अब मीडिया बिकी हुई है ये तो समझ आता है लेकिन बिपक्ष को क्या हो गया है, वो क्यों नहीं देश को बताते की रोबेर्ट बढेरा जो कांग्रेस के दामाद हैं उन्हें देश के किसी भी एअरपोर्ट पर चेक्किंग का सामना नहीं करना पड़ता, वो जो चाहे इधर से उधर ले जा सकते हैं. राहुल गाँधी को जब FBI ने ड्रग्स के साथ पकड़ा था तो ब्रजेश मिश्र ने उन्हें रातों रात क्यों छुड़ाया. फिरोज गाँधी इंदिरा से अलग हो गए क्यों... ऐसे बहुत सारी बातें हैं जो बिपक्ष को पता है मीडिया को पता है पर वो १% जनता को सोसल नेटवर्किंग के द्वारा पता चलती हैं क्यों ???  

घोटाला करना बहुत आसान है, अब अगर सीबीआई अपने हाथ में हो, कानून अपने हाथ में हो और मीडिया अपने हाथ हो तो कोई भी घोटाला करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है. जब कोई घोटाला करता है तो वो भी सारी चीज़ें पहले देखता है की अगर पकडे गए तो क्या क्या हो सकता है. नेताओं को सबसे बड़ा डर जो होता हैं वो है जनता का सपोर्ट चला जाना. अब अगर आपके हाथ में करप्ट मीडिया है तो वो आपकी इमेज  ख़राब नहीं होने देगी मतलब जनता घोटाला करने के बाद भी आप को ही वोट देगी.

दूसरा सबसे बड़ा दर होता है सजा होने का, अब अगर कानून इतने लचर पचर हों, सीबीआई आपके बाप के जेब में हो तो सही जाँच होने का तो सवाल ही नहीं तो आप घोटाले करने के बाद भी सजा से बच सकते हैं, ओर ऐसा तो कोई कानून नहीं की जो पैसा आपने खा लिया वो बापस देना पड़े. तो अगर सजा हो भी गयी तो जेल में कोई कष्ट नहीं होगा, पूरे ऐशो आराम मिलेंगे वहां, ओर बैंक बैलेंस तो हो ही गया.

कुल मिला ले बात यही है की ग़ुलामी बता के नहीं आती, बस आ ही जाती है  - तैयार रहे