Sunday, September 8, 2013

क्या एक पुरुष की बुरी नज़र से महिला को बचाने की जिम्मेदारी दुसरे पुरुष की है.

महिलाओ की सुरक्षा आज एक बहुत बड़ा सवाल बन गया है… घर से बहार निकलते वक़्त शायद ही कोई महिला हो जो इस बारे में सहमा हुआ महसूस न करती हो. रास्ते में, ऑफिस में, बाज़ार में, ट्रेन में, बस में हर जगह पुरुषों की निगाहें महिलाओं को स्कैनर की तरह देखती रहती हैं।

दिसम्बर के महीने में दिल्ली में एक ऐसी घटना हुई जिसने पुरे देश को झकझोर कर रख दिया था, दिल्ली में एक बिहारी महिला के साथ बलात्कार हुआ, मुंबई में डॉ पर एक गरीब महिला मरीज़ से बलात्कार करने का आरोप लगा, जोधपुर में एक तथाकथित संत ने एक नाबालिक लड़की का यौन उत्पीडन किया, मुंबई में एक फोटो पत्रकार से सामूहिक बलात्कार हुआ और झारखंड में महिला पुलिस कर्मी से ही बलात्कार किया गया. ये उस देश में हो रहा है जहाँ हम स्त्री जाती को देवी के रूप में पूजते है.




क्या है इसके बजह क्या पुरुष जाती लगातार गिरती चली जा रही है या पुरुष होते ही ऐसे हैं। सवाल ये नहीं है की क्या समज महिलाओ के प्रति इतना असंवेदनशील कैसे हो गया. सवाल ये है क्या इस देश की कानून और न्याय व्यवस्था ने हमे इतना असंवेदनशील और निर्भय बना दिया है?

अगर बात सुरक्षा की करें तो किससे किसकी सुरक्षा। एक पुरुष की बुरी नज़र से महिला को बचाने की जिम्मेदारी दुसरे पुरुष पर है. दूसरा पुरुष रजा हरिश्चन्द्र की औलाद है इसकी क्या गारैंटी।

अब अगर समाज में देखा जाये तो महिलाओं के प्रति पुरुषों का आकर्षित होना आम बात है,
लड़कियों के बॉयफ्रेंड होना आम बात है,
ऑफिस में अफेयर होना आम बात है,
सड़क पर कम कपडे पहन कर चलती हुई लड़की आम बात है,
अख़बारों में बिकनी आम बात है,
Deo लगाते ही लडकी का पास आना ये बिग्यापन आम है,
शेव करने के बाद लडकी का गालों पर हाथ फेरने का बिग्यापन आम है,



किसी भी प्रोडक्ट को बेंचना हो लडकी का होना जरूरी है,  मतलब लडकी होने से माल जल्दी बिकता है। ये सब कुछ आम बात है और ये एक लडकी का अधिकार है, कोई भी लडकी जब चाहे किसी के साथ भी अफयेर कर सकती है पर उसको इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, लडकी चाहे तो बोय्फ्रेंड रखे चाहे तो न रखे कोई उसे जबरदस्ती अपनी गर्लफ्रेंड नहीं बना सकता, लडकी चाहे तो मिनी स्कर्ट पहने, चाहे तो लो वेस्ट जींस पहने, चाहे तो बिकनी पहने या चाहे तो साडी पहने या सूट पहने ये उसका अधिकार है।

पर उसको अगर मिनी स्कर्ट में देखकर कोई लड़का छेड़ता है तो इसका मतलब लड़के में संस्कार नहीं ऐसे लडको को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चहिये. अच्छे संस्कार वाले लडको को आगे आना चाहिए ओर अगर कभी किसी लडकी को कोई लफंगा परेशां कर रहा है तो उसे बचाना और घर तक छोड़ कर आना उस अछे संसार वाले लड़के का कर्तब्य है.

कुल मिलाकर इस देश को सख्त से सख्त कानून की जरूरत है जो लड़कियों की आज़ादी भी बरक़रार रखें ओर मनचलों को सबक भी सिखाएं।