हमें एक दो बिस्फोट की आदत डाल लेनी चाहिए
राहुल गाँधी ने घुमा फिरा के ये कहा है की हमें एक दो बिस्फोट की आदत डाल लेनी चाहिए अफगानिस्तान पाकिस्तान में तो कितने मरते हैं, यहाँ भी कुछ मर गए तो क्या हो गया आतंकी का काम है बम फोड़ना वो फोड़ते हैं जनता का काम है मोमबत्ती जलाना वो जलाती है सरकार का काम है जांच करना वो करती है राष्ट्रपति प्रधानमंत्री का काम है शोक प्रकट करना वो करते हैं हर कोई अपना काम कर रहा है फिर इतना हंगामा क्यों आखिर सबको एक दिन मरना तो है ही
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जब एक प्रधानमंत्री का पुत्र लंदन में एक लड़की के साथ डेटिंग कर रहा था ,केजीबी जो भारत और सोवियत रिश्तों की खासा परवाह करती थी , ने अपनी नजर इस पर लगा दी , ये स्वाभाविक भी था , तब उन्हें पता लगा कि ये तो स्टेफनो की बेटी है , जो उनका इटली का पुराना विश्वस्त सूत्र है। इस तरह केजीबी ने इस शादी को हरी झंडी दे दी। इससे पता चलता है कि केजीबी श्रीमती इंदिरा गांधी के घर में कितने अंदर तक घुसा हुआ था।
http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/06/blog-post_14.html
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अब सरकार तर्क देगी की भुना ओर तला हुआ खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं है इसलिए कच्ची सब्जियां खाईये फल खाईये, इससे सेहत तो अच्छी रहेगी ही साथ में गैस भी बचेगी तो गैस सिलिंडर चाहे 1000 का भी हो जाये तो जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा
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बाबा का विरोध तो कर रहे हैं बहुत से लोग लेकिन जब काला धन बापस आएगा तो यही सबसे आगे लाइन में लगकर फायदा उठाएंगे, यही होता आया है हमेशा, जो आजादी के लिए लड़े उन्हें कुछ नहीं मिला आज़ादी के बाद, लूट के खा गारे सब अंग्रेजों के पिठू. June 23 at 10:51pm
भोपाल गैस हत्याकांड: 25 साल और 6 माह तक चली अदालती कार्यवाही, 135 से अधिक प्रस्तुत हुए गवाह, 7 से अधिक बदले गए न्यायाधीश, 3000 से अधिक पन्नों पर लिखा गया फैसला | फैसला क्या था ? भोपाल में यूनियन कार्बाइड नाम की अमरीकी कंपनी के कारखाने में 3 दिसंबर 1984 की रात को जहरीली मिथाइल आइसो साइनेट गैस के रिसाव के कारण एक ही रात में लगभग 17000 लोग मर गए थे | और अभी तक 35000 मर चुके हैं | 5 लाख से अधिक जीवित लोगों पर इस जहरीली गैस मिथाइल आइसो साईंनाइड का दुष्प्रभाव पड़ा है | जो मर गए वो तो मुक्त हो गए | लेकिन जो जीवित रह गए हैं उनका हाल मरे हुओं से बदतर है | इस हत्याकांड के बाद पैदा हुए बच्चों पर जेनेटिक दुष्प्रभाव भी गहरा पड़ा है | सारी दुनिया के औद्योगिक इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी मानी गयी है ये दुर्घटना | 1986 में इस दुर्घटना के बारे में अदालती कार्यवाही शुरू हुयी और 26 साल बाद अभी 6 जून 2010 को फैसला आया था | इस फैसले में अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड को छोड़ दिया गया था| इस अमरीकी कंपनी के भारतीय साझेदार केशव महिन्द्रा और उनके सहयोगियों को 2 साल की जेल, जिसमे कभी भी जमानत हो सकती है, दी गयी था|
- साभार: rajivdixit.com. June 21 at 9:12pm
यहाँ मेरा इस बात को रखने का मतलब ये है कि आज भी हजारों कारखाने चल रहे हैं और बहुत सारी नोर्म्स फालो नहीं हो रही, कभी भी कुछ भी हो सकता है और जनता फिर मोमबत्तियां जलाएगी, फिर भूल जाएगी, फिर कोई आतंकबादी हमला होगा, जनता फिर मोमबत्तियां जलाएगी, फिर भूल जाएगी.... कहने का मतलब सिर्फ यही है कि हम मरते हैं कुछ हरामखोर नेताओं कि बजह से और फिर मोमबत्तियां जलाते हैं... कब तक चलेगा ये सब? June 22 at 8:56am
Teharpuria Bk Jab tak Neta log janta se darne nahi lagege tab tak kuch nahi ho sakta.
Shiv Kumar Agrawalla bhopal jaise gas trajedi ko dil karne ke liye hamare desh mein abhi tak koi kanoon nahi bana hey ....to phir kis umid se nyaya nahi mila bolte hey
Veeresh Kumar ye jab tak chalega jab tak k hm log sirf ye sochte rahenge k kon sahi h bajay ye sochne k ki kya sahi h?
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अरे अगर हम १०० २०० रुपये भी किसी को देते हैं तो इसलिए की बापस मिल जायेंगे, अगर नहीं भी मिलते तो पूछ लेते हैं की कब दोगे. इन सरकारों को तो हमने अपने खून पसीने की कमाई दी है १३४ टाइप के टैक्स के द्वारा. ये हरामखोर लोग चाहते हैं की हम हिसाब न मांगे, किसान आत्महत्या करें लेकिन हिसाब न मांगो, गरीब बिन इलाज के मर जाये पर हिसाब न मांगो, अनाज पड़ा पड़ा सड जाये और बच्चे भूके पेट सो जाएँ पर हिसाब न मांगो, बेटी की शादी में गरीब की कमर टूट जाये लेकिन हिसाब न मांगो........... इस सरकार ने साफ़ कर दिया है की हिसाब मांगोगे तो लाठियां खानी पड़ेंगी अब जबाब हमें देना है. June 20 at 10:22pm