संस्कृति के लिए मशहूर जहाँ जन संस्कृति मंच के उपाध्यक्ष रहे हैं स्वर्गीय लोकगायक भूपेन हजारिका और मातृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था के लिए जाने वाले असम राज्य में हुए दंगे बहुत ही शर्मनाक है. ये सिर्फ जनता के लिए शर्मनाक है सरकार के लिए नहीं. सरकार तो और बढावा दे रही है, देश के दुसरे हिस्सों में हिंसा हो रही है अगर सरकार चाहे तो कुचल सकती है इए कृत्यों को पर वोट बैंक की राजनीति ने इंसानियत नाम की चीज़ को ही ख़तम कर दिया है.
सरकार इंतज़ार किस बात का कर रही है, देश के सभी लोगों को सबसे पहले चिंता अपने देश की होनी चाहिए, दुसरे देशों में क्या हो रहा है वो बाद में पहले खुद को ठीक करो. सब बेकार है अगर हम अपने देश में शांति ना बना पायें.
संस्कृति के लिए मशहूर जहाँ जन संस्कृति मंच के उपाध्यक्ष रहे हैं स्वर्गीय लोकगायक भूपेन हजारिका और मातृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था के लिए जाने वाले असम राज्य में हुए दंगे बहुत ही शर्मनाक है. ये सिर्फ जनता के लिए शर्मनाक है सरकार के लिए नहीं. सरकार तो और बढावा दे रही है, देश के दुसरे हिस्सों में हिंसा हो रही है अगर सरकार चाहे तो कुचल सकती है इए कृत्यों को पर वोट बैंक की राजनीति ने इंसानियत नाम की चीज़ को ही ख़तम कर दिया है.
सरकार इंतज़ार किस बात का कर रही है, देश के सभी लोगों को सबसे पहले चिंता अपने देश की होनी चाहिए, दुसरे देशों में क्या हो रहा है वो बाद में पहले खुद को ठीक करो. सब बेकार है अगर हम अपने देश में शांति ना बना पायें.
असम - म्यामार की प्रतिक्रिया देश के अन्य हिस्सों में क्यों ?
आजाद मैदान के शहीद स्मारक को लातो से क्यों तोडा गया ? क्या यह औरंगजेब की मानसिकता और वंशजो के कारनामे है ?
देखिये और दीजिये अपनी बेखौप राय !
इसे इतना फॉरवर्ड / शेअर कीजिये की देश भक्तो का हौसला बढे और देशद्रोहियों का हौसला घटे !
पलायन
पूर्वोत्तर क्षेत्र के हज़ारों लोगों का पलायन हो रहा है और मीडिया और नेतागण इस मुद्दे पर भी अपने स्वार्थ की रोटी सेंकने में लगे है .
- फेस बुक ने जिस तरह जनांदोलनों को लोकप्रिय बनाया और लोगों में जागरूकता फैलाई और जनमत बनाने में मदद की उससे डर कर मीडिया पर भ्रष्ट नेताओं द्वारा प्रायोजित बहस चलाई जा रही है क्या फेस बुक पर बैन लगना चाहिए .
- सच्चाई तो यह है की मीडिया ही अफवाहों जैसी ख़बरें देती है और हिंसा , सेक्स और सनसनी फैलाने वाले कार्यक्रम दिखाती है .
- जो संगठन इस पलायन को रोक रहे थे और उनकी मदद के लिए खड़े हुए उसे भी ये नकारात्मक तरीके से पेश कर रहे थे .
- अगर आपके आस पास ऐसे कोई पलायन कर रहा है तो उसे मदद करें और उसकी हिम्मत बंधाये . अफवाहों को फैलने से रोके .
- डर एक संक्रामक भावना है . वरना इतने हज़ारो लोग कुछ मुट्ठी भर लोगों की धमकी से क्यों डर रहे है ? पुलिस को बताये , अपने आस पास के लोगों से मदद मांगे और आपस में भी मिल कर रहे . किसी से ना डरे . ये देश अपना है .
Smita Rajesh
जैसा आप सबको मालूम है कि हम पति -पत्नी यहाँ मुंबई में अपनी कास्टिंग एजेंसी चलते हैं जिसके द्वारा हम मॉडेल्स और कलाकारों को अलग अलग जरूरतों के हिसाब से ओडिशन्स में भेजते हैं और ये रोज़ का काम है ..कम से कम 200-300 कलाकार प्रति ओडिशन्स के हिस
ाब से ..और यह हम करते हैं एस एम एस के जरिये ...आज 5 से ज़्यादा पर प्रतिबंध लागू हुआ है ..मतलब काम ठप्प .सिर्फ एक सवाल इन हुक्मरानों से..क्यो इनकी नाकामयाबी हम पर ठीकरा बन फूटें ? अरजाकता इनके कारण ..भुगते हम , क्यो किसी खास को इतना सर चढाते हो कि वो नियंत्रण से बाहर हो जाएँ ? दूसरे देशों से थोक के भाव में पलायन ..क्यो, हमारा देश इतना समृद्ध कब से हो गया ? पिछले दिनों जो भी हुआ ..और हो रहा है ..सरकार आँखें बंद किए क्यो बैठी हैं ? आज उत्तर -पूर्वी प्रांत के नागरिक अपने ही देश में दहशत जद हैं ..मैडम जी ,बहत हो गया यार ..हमे अपने देश में जी लेने दो ..आप तो निकाल लोगी जब वक़्त आएगा ."माल असबाब " के साथ अपने देश ...हमारे पास तो यही एकमात्र देश है ..वही बक्ष दो ....[नक्कारखाने में तूती की आवाज़ ..जानती हूँ ..मगर ..क्या करूँ ? ] अराजकता ..व्यक्तिगत तकलीफ नहीं देती ..यह सभी को पीड़ित बनाती है ....
धर्मनिरपेक्षता की आड़ में मुस्लिम परस्ती का जो खेल वामपंथी विचारकों ने आजादी से लेकर अब तक खेला है उसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं | वामपंथ ने कभी सशक्त भारत नहीं चाहा ,उनकी मंशा हमेशा भारत को कमजोर करने की रही है उधाहरण के लिए भारत विभाजन में जिन्ना की पूरी मदद और 1962भारत चीन युद्ध में चीन का समर्थन करना || वामपंथी जानते थे की यदि भारत को कमजोर करना है तो हिंदुत्व पर चोट जरुरी है, वामपंथ ने दो तरीके से भारत को कमजोर करने का षड्यंत्र रचा पहला हिंदुत्व पर चोट और मुस्लिमों का तुष्टिकरण | इस्लाम ने कभी शांति की भाषा नहीं बोली , इस्लाम तो हिंसा बलात्कार से फला फुला है | इस्लाम को भारत में बोधिक कुतर्क इन वामपंथियों ने दिए और आज जब पूरा भारत इस्लामिक जिहाद से जल रहा है तब ये वामपंथी विचारक शुतरमुर्ग की तरह अपना सर रेत में घुसाए पड़े हैं |
साला हजारों हजार साल हो गए धरती पर जीवन को ..लेकिन लगता हैं किसी सर्कस में बैठे हुए हों ...कोई धार्मिक बन के तोड़ फोड कर रहा है तो कोई महादलित बन के झंडा फहरा रहा है|
लखनऊ में समाजवादी पार्टी ने मैराथन दौड का आयोजन किया जो शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ....
अफगानिस्तान में तालिबानियों ने बुद्ध प्रतिमाओ को निशाना बनाया था
तो पुरे विश्व में जबरदस्त आक्रोश और प्रतिक्रिया आई थी लेकिन यहाँ लखनऊ में जेहादियों द्वारा बुद्ध प्रतिमा और पार्क में जबरदस्त नुकसान पहुचाने पर "इलेक्ट्रोनिक मीडिया" "सेकुलर" सभी खामोश है
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जय भीम की राजनीती करने वाले....
छुआ-छूत का नाम लेकर वोट बटोरने वाले ...
गन्दी नाली दे कीड़े न जाने कौनसे बिल में छिप कर बैठे है....
कब सुधरेंगे हालात .....................
एक के बाद एक दंगे...............
पहले कश्मीर, फिर असम जला .........
और अब असम कि आग में पूरा देश जल रहा है, मुंबई , बंगलौर ,पुणे,हैदराबाद लखनऊ, कानपूर, इलाहबाद सब जल रहा है...........
अलविदा की नमाज में जो हाथ दुवा के लिए उठे थे थोड़ी हे देर बाद उन्ही हाथो में तलवारे आ गई. रमजान के माह में भी अराजकता मेरी समझ में तो नहीं ही आई. केसे कहे की वह मेरे हिन्दुस्तानी भाई हे थे जो बसों पर पार्को पर निरीहों पर अपना क्रोध दिखा रहे थे. एक अफवाह भी इतना मायने रखती है. ये हरकते हमें कमजोर तो बनाती ही है देश के दुश्मनों को ताकत भी देती है...अपना ही नुकसान अपनों का नुकसान अंदर तक परेसान क्र गया. उम्मीद है पागलपन विकास को लेकर आयेगा विनाश को लेकर नहीं.
क्या अफवाह इसलिए तो नहीं फेलाई जा रही है जिससे देश वासियों का ध्यान रिकॉर्ड तोड़ घोटालो पर न जा सके, मुझे तो ज्यादा समझ नहीं है आप अपना दिमाग लगाये
मेरी समझ में ये नहीं आया की कैसे १० मिनट में स्पेशल ट्रेन गोहाटी के लिए आ गयी .
इस देश में साम्प्रदायिकता और धर्म निरपेक्षता पर चर्चा होती है
साम्प्रादायिकता का प्रतीक मोदीजी
और धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक सोनिया राहुल मुलायम अखिलेश आदि
असम में दंगो के बाद धर्मनिरपेक्षो के दामादों ने असम के बाद मुम्बई इलाहाबाद पुणे लखनऊ बरेली कानपूर सहित देश के तमाम हिस्सों में आतंक फैलाया
बस वहि हिम्मत नहीं पड़ी जहा मोदी कि छाया दिखाई दीगुजरात मध्यप्रदेश झारखण्ड छतीस गढ़ आदि
अब आप तय करे आप को साम्प्रदयिक साशन चाहिए या धर्म निरपेक्ष
क्या आपने कभी जाना जब जब भी दलित पिछड़ा आदीवासी और मुसलमानों का वंचित समाज प्रगतिवादियों के साथ मिलकर अपनी बहतरी के लिए आवाज बुलंद करेंगा ..एक होने की कौशिश करेंगा .. तभी तभी हिन्दू मुस्लिम झगड़े चरम पर आ जाते हैं .....क्यों....?
लखनऊ में समाजवादी पार्टी ने मैराथन दौड का आयोजन किया जो शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ....
अफगानिस्तान में तालिबानियों ने बुद्ध प्रतिमाओ को निशाना बनाया था
तो पुरे विश्व में जबरदस्त आक्रोश और प्रतिक्रिया आई थी लेकिन यहाँ लखनऊ में जेहादियों द्वारा बुद्ध प्रतिमा और पार्क में जबरदस्त नुकसान पहुचाने पर "इलेक्ट्रोनिक मीडिया" "सेकुलर" सभी खामोश है
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जय भीम की राजनीती करने वाले....
छुआ-छूत का नाम लेकर वोट बटोरने वाले ...
गन्दी नाली दे कीड़े न जाने कौनसे बिल में छिप कर बैठे है....
अफगानिस्तान में तालिबानियों ने बुद्ध प्रतिमाओ को निशाना बनाया था
तो पुरे विश्व में जबरदस्त आक्रोश और प्रतिक्रिया आई थी लेकिन यहाँ लखनऊ में जेहादियों द्वारा बुद्ध प्रतिमा और पार्क में जबरदस्त नुकसान पहुचाने पर "इलेक्ट्रोनिक मीडिया" "सेकुलर" सभी खामोश है
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तो पुरे विश्व में जबरदस्त आक्रोश और प्रतिक्रिया आई थी लेकिन यहाँ लखनऊ में जेहादियों द्वारा बुद्ध प्रतिमा और पार्क में जबरदस्त नुकसान पहुचाने पर "इलेक्ट्रोनिक मीडिया" "सेकुलर" सभी खामोश है
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जय भीम की राजनीती करने वाले....
छुआ-छूत का नाम लेकर वोट बटोरने वाले ...
गन्दी नाली दे कीड़े न जाने कौनसे बिल में छिप कर बैठे है....
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जय भीम की राजनीती करने वाले....
छुआ-छूत का नाम लेकर वोट बटोरने वाले ...
गन्दी नाली दे कीड़े न जाने कौनसे बिल में छिप कर बैठे है....
कब सुधरेंगे हालात .....................
एक के बाद एक दंगे...............
पहले कश्मीर, फिर असम जला .........
और अब असम कि आग में पूरा देश जल रहा है, मुंबई , बंगलौर ,पुणे,हैदराबाद लखनऊ, कानपूर, इलाहबाद सब जल रहा है...........
एक के बाद एक दंगे...............
पहले कश्मीर, फिर असम जला .........
और अब असम कि आग में पूरा देश जल रहा है, मुंबई , बंगलौर ,पुणे,हैदराबाद लखनऊ, कानपूर, इलाहबाद सब जल रहा है...........
अलविदा की नमाज में जो हाथ दुवा के लिए उठे थे थोड़ी हे देर बाद उन्ही हाथो में तलवारे आ गई. रमजान के माह में भी अराजकता मेरी समझ में तो नहीं ही आई. केसे कहे की वह मेरे हिन्दुस्तानी भाई हे थे जो बसों पर पार्को पर निरीहों पर अपना क्रोध दिखा रहे थे. एक अफवाह भी इतना मायने रखती है. ये हरकते हमें कमजोर तो बनाती ही है देश के दुश्मनों को ताकत भी देती है...अपना ही नुकसान अपनों का नुकसान अंदर तक परेसान क्र गया. उम्मीद है पागलपन विकास को लेकर आयेगा विनाश को लेकर नहीं.
क्या अफवाह इसलिए तो नहीं फेलाई जा रही है जिससे देश वासियों का ध्यान रिकॉर्ड तोड़ घोटालो पर न जा सके, मुझे तो ज्यादा समझ नहीं है आप अपना दिमाग लगाये
मेरी समझ में ये नहीं आया की कैसे १० मिनट में स्पेशल ट्रेन गोहाटी के लिए आ गयी .
मेरी समझ में ये नहीं आया की कैसे १० मिनट में स्पेशल ट्रेन गोहाटी के लिए आ गयी .
इस देश में साम्प्रदायिकता और धर्म निरपेक्षता पर चर्चा होती है
साम्प्रादायिकता का प्रतीक मोदीजी
और धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक सोनिया राहुल मुलायम अखिलेश आदि
असम में दंगो के बाद धर्मनिरपेक्षो के दामादों ने असम के बाद मुम्बई इलाहाबाद पुणे लखनऊ बरेली कानपूर सहित देश के तमाम हिस्सों में आतंक फैलाया
बस वहि हिम्मत नहीं पड़ी जहा मोदी कि छाया दिखाई दीगुजरात मध्यप्रदेश झारखण्ड छतीस गढ़ आदि
अब आप तय करे आप को साम्प्रदयिक साशन चाहिए या धर्म निरपेक्ष
क्या आपने कभी जाना जब जब भी दलित पिछड़ा आदीवासी और मुसलमानों का वंचित समाज प्रगतिवादियों के साथ मिलकर अपनी बहतरी के लिए आवाज बुलंद करेंगा ..एक होने की कौशिश करेंगा .. तभी तभी हिन्दू मुस्लिम झगड़े चरम पर आ जाते हैं .....क्यों....?
साम्प्रादायिकता का प्रतीक मोदीजी
और धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक सोनिया राहुल मुलायम अखिलेश आदि
असम में दंगो के बाद धर्मनिरपेक्षो के दामादों ने असम के बाद मुम्बई इलाहाबाद पुणे लखनऊ बरेली कानपूर सहित देश के तमाम हिस्सों में आतंक फैलाया
बस वहि हिम्मत नहीं पड़ी जहा मोदी कि छाया दिखाई दीगुजरात मध्यप्रदेश झारखण्ड छतीस गढ़ आदि
अब आप तय करे आप को साम्प्रदयिक साशन चाहिए या धर्म निरपेक्ष