आज भारत जैसे पवित्र देश मे विदेशी कंपनियो ,भ्रष्ट नेताओ की वजह से ऐसी पवित्र गौ माता की हत्या की जा रही है जिनकी पूजा भगवान श्री कृष्ण ने की थी... भगवानों को भी पालने वाली सुखदात्री गौ मात को निर्ममता और बर्बरता के साथ तड़पा तड़पा कर मारा जाता है
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दाऊद का आदमी करीम मोरानी शाहरुख खान का पार्टनर है और उसका पैसा Ra-One फिल्म मे लगा हुआ है, मतलब अगर हम फिल्म देखने जायेंगे तो अगले बिस्फोट को finance करेंगे, मौत फंड में इन्वेस्टमेंट, mutual फंड एंड share market से कहीं बेहतर, साधा मोक्ष कि प्राप्ति...
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हमारी Govt कहती है जो एक दिन में 32 रुपये खर्च कर सकता है वो गरीब नहीं है, इसका मतलब जो 100 कर सकता है वो अमीर है, जो 500 कर सकता है वो बहुत अमीर है और 1000 या उससे ज्यादा कर सकता है वो भगवान जाने क्या है. अब अगर CCD की एक कप काफी हो या pizza hut का pizza , quality walls की icecream हो या TGIF की एक शाम. जो इन सब पर normally खर्च करते रहते हैं वो तो बहुत अमीर हैं और ये सोच सोच के बहुत खुश भी हैं. लेकिन जरा संभल के कहीं एक कप काफी या पिज्जा की CBI जांच न हो जाये.
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एक आदमी को चिराग मिला, वो बहुत खुश हुआ, जल्दी से उसे रगड़ना शुरू किया और बिस्फोट हो गया 7 मर गए 17 घायल हो गए........
Moral of the story: ये अलादीन का तिलस्म नहीं कांग्रेसी राज है कोई भी चीज़ बम हो सकती है.
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सिस्टम कितना हो घटिया क्यों ना हो, उसमे भी कुछ लोग Success पा ही लेते हैं अच्छी बात है, problem तब होती है जब उन्हें वो घटिया सिस्टम दिखना बंद हो जाता है और वो कहने लगते हैं की सब ठीक तो है मैं भी तो कर रहा हूँ. लेकिन उनका क्या जो ज्यादा hard worker या intelligent तो नहीं हैं बस अपना काम सीधे सीधे करना जानते हैं, वो इसलिए मरते हैं क्योंकि सिस्टम घटिया है.
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कहते हैं सूरज की रोशनी, नदियों का पानी और हवा पर सबका हक़ है। लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं है। छत्तीसगढ़ की कई नदियों पर निजी कंपनियों का कब्जा है। छत्तीसगढ़ की इन नदियों में आम जनता नहा नहीं सकती, पीने का पानी नहीं ले सकती, मछली नहीं मार सकती।
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9/11 के बाद अमेरिका में एक भी बिस्फोट नहीं हुआ, उनका एक भी आदमी नहीं मरा क्योंकि अमेरिका ने आतंकियों को घर में घुस के मारा, हमारे यहाँ गिनती नहीं इतने लोग मारे गए, ज़िन्दगी अगर सबसे सस्ती है तो यहाँ है
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चारो तरफ सुरक्षा व्यबस्था को लेकर बबाल मचा रखा है, अरे जंग बचाव करके नहीं आक्रमण करके जीती जाती है, आज की बर्तमान सरकार और बिपक्ष कतई नहीं चाहते कि आतंकबाद ख़त्म हो
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प्रधानमंत्री ने कहा है हम डरेंगे नहीं, हमारे पास 120 करोड़ हैं देखते हैं तुम कितने मारोगे, हमारी जनता मरने के लिए तैयार है.
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दिल्ली पुलिस कई दिनों से भोंपू लगाकर सतर्क रहने का प्रचार कर कर रही है. इससे कुछ नहीं होगा क्योंकि यहाँ सरकार की नीयत ही आतंकबाद को खत्म करने की नहीं है, आतंकबाद को जनता को सतर्क रखकर ख़त्म नहीं किया जा सकता. आतंकबादियों को मारकर इसे ख़त्म किया जा सकता है. हमारी सरकार मानवता की पुजारी है, यहाँ जनता जलील मौत मर जाये लेकिन कसाब या गुरु को नहीं मारेंगे. आखिर इंसानियत भी तो भला कोई चीज़ है.
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सरकार पूरी तरह से तानाशाही पर उतर आई है, अब तो सिर्फ एक ही जबाब होना चाहिए - असहयोग और विरोध. सरकार बिकी हुई मीडिया का इस्तेमाल कर रही है उनके खिलाफ जो भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं. जनता के पास एक हथियार है वो है जो न्यूज़ चैनल बिके हुए हैं उनके कनेक्शन कटवा दो. किसी भी घर में ये न्यूज़ चैनल होने ही नहीं चाहिए. NDTV ओर IBN 7 के बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं.
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एनडीटीवी - खबर वहीं जो कॉंग्रेस चाहे
स्टार न्यूज़ - कॉंग्रेस को रखे आगे
आज तक - सबसे भ्रष्ट
आईबीएन 7 - खबर हर कीमत पर, कीमत बस 25 करोड़
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अन्ना 11 दिनों से भूखे बैठे हैं, पूरे देश का सपोर्ट भी उनके साथ है, दूसरी तरफ ये हरामखोर 543 सांसद हैं जो अपनी सीट से सिर्फ 15 से 20% वोट लेकर जीत के आये हैं, ये कहते हैं हमें जनता ने चुना है. बकबास है ये गणित. 100 में 50 तो वोट डालते हैं, ये 50 कम से कम 4 मेन पार्टियों में बंट जाता है जीतने वाले को 15 से 20% के आस पास मिलता है. अब ये कानून बनाते हैं पूरे 100 के लिए, जिसका इन्हें कोई हक नहीं. जनता जिसके साथ है बात उसी की मानी जाएगी.
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कल अगस्त 23 को हमने अपने शहर फतेहगढ़ में प्रदर्शन किया ओर मार्च निकाला, 20 क आसपास लोग चले थे शुरुआत में, धीरे धीरे 50 के आसपास हो गए, लोग ज्यादा नहीं हो पाए लेकिन जज्बा सभी का देखने लायक था, कड़ी धुप में सबसे ज्यादा उत्साहित तो बच्चे थे. हम जिस गली से निकलते थे लोग पूरे उत्साह के साथ कुछ दूर चलते थे. बहुत अच्छा दिन रहा.
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मत कहो की इन्कलाब में देर हो रही है
लम्हा- लम्हा रात की सवेर हो रही है
हक मांगने गये थे मुंसिफ से गांधीवराना
लहूलुहान उनके घरों कि मुंडेर हो रही है
... ...
कुछ बेटे इंकलाबी हुए कुछ के दुनियावी हो गये
कुछ घरों में फ़ाके है माएं कुछ और रो रही है
बस दिल बहलाने को तेरे दरबार में आये थे
मुंसिफ तेरे तमाशे में फिर देर हो रही है
सर तलवार पर जो रख दिया अन्ना ने गाज़ीयों
कातिल कि जीत तय थी क्यों हार हो रही है
----कुमार गुंजन
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आजादी के समय मतलब १९४७ में 1 डॉलर 1 रुपया के बराबर था और अभी लगभग 50 रुपये के बराबर है, अरे क्या घंटा आजादी मिली है,बकबास है ये आज़ादी का ढोंग... फिर भी जिन्हें ख़ुशी मिलती है उन्हें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें
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आरक्षण एक बेहतरीन फिल्म है, बिना बात में हो हल्ला मचाया हुआ है. शिक्षा के व्यवसायीकरण के जहर को दिखाया है जो कि हमारी देश को खोखला करता जा रहा है. इस फिल्म को टैक्स फ्री करना चाहिए, सबको देखना चाहिए. फिल्म सामाजिक द्रष्टिकोण से एकता और समानता को बढावा देती है
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सरकार जैसा चाह रही है बैसा ही हो रहा है, सरकार चाहती हैं कि सबका ध्यान लोकपाल बिल पर आ जाये, कोई काले धन कि बात न करे, कोई ये न पूछे कि स्विस बैंकों में पैसा किसका है, जहाँ तक लोकपाल कि बात है इसे तो सरकार आसानी से tackle कर सकती है
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किसान अन्नदाता है, वो जीवन को चलाने के लिए जो सबसे जरूरी चीज़ है उसको पैदा करता है, और जब औद्धोगीकरण की अंधी दौड़ में कोई सरकार किसानो पर गोलियां चलवा दे तो इससे ज्यादा घिनौनी हरकत कोई हो ही नहीं सकती. अगर इसे विकास कहते हैं तो नहीं चाहिए ऐसा विकास.
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बहुत सुना है कि एक मछली तालाब को गन्दा कर सकती है, तो ऐसा भी तो कह सकते हैं कि एक मछली तालाब को साफ़ भी कर सकती है...
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आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
आग जलनी चाहिए आग जलनी चाहिए !!!
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